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Vision

Vision/ Mision

Vision of Sparsh Himalaya

अनादि काल से हमारे ग्रंथो में, हमारे गीतों मैं हिमालय को भारत का मुकुट और प्रहरी उपनाम  से पुकारा गया हैI हिमालय की गोद में साहित्य, भारतीय संस्कृति ने न केवल जन्म लिया है पर इसे पुष्पित पल्लवित होने का मौका भी मिला। समाज शास्त्री और वैज्ञानिक सामान रूप से हिमालय को एक अद्भुत प्रयोगशाला के रूप में जानते हैं उस पर अध्ययन करते हैंI यह हिमालय ही है जो अपने हज़ारों हिमनदों का  स्रोत होने से करोड़ों लोगो की क्षुधा और प्यास को दूर करता हैI हिमालय के ऊपर और वैज्ञानिक विश्लेषण करने से पता चलता है कि इसमें पास अपार खनिज, वन एवं अपार जल सम्पदा हैI यहाँ की मानव सम्पदा का लोहा पूरा विश्व मानता है। आज भी भारत में शीर्ष पदों पर आसीन हिमालय के लोग  माँ भारती की सेवा मे तत्पर हैंI हिमालय में अनेक संसाधन हैं और इनमे सबसे महत्वपूर्ण जल संसाधन हैI हिमालय को जल मीनार की रूप में  जाना जाता है

हिमालय के संसाधन

हिमालय की आर्थिक परिस्थितियाँ इस विभिन्न परिस्थिति वाले विस्तृत और विषम क्षेत्र के सीमित संसाधनों के अनुरूप हैं। यहाँ की मुख्य गतिविधि पशुपालन है, लेकिन वनोपज का दोहन और व्यापार भी महत्त्वपूर्ण है। हिमालय में प्रचुर आर्थिक संसाधन हैं। इनमें उपजाऊ कृषि योग्य भूमि, विस्तृत घास के मैदान व वन, खनन योग्य खनिज भंडार और आसानी से दोहन योग्य जलविद्युत शक्ति शामिल हैं। पश्चिमी हिमालय में सबसे उत्पादक कृषि योग्य भूमि कश्मीर घाटी, कांगड़ा सतलुज नदी के बेसिन और उत्तराखंड में गंगा व यमुना नदियों के कगारी क्षेत्र के सीढ़ीदार खेतों में है। इन क्षेत्रों में चावल, मक्का, गेहूँ, ज्वार-बाजरा का उत्पादन होता है। मध्य हिमालय में नेपाल में दो-तिहाई कृषि योग्य भूमि तराई और इससे लगे मैदानी क्षेत्र में है। इस भूमि में देश के कुल चावल उत्पादन का अधिकांश हिस्सा पैदा होता है। इस क्षेत्र में बड़ी मात्रा में मक्का, गेहूँ, आलू और गन्ने की भी खेती की जाती है|

सामुदायिक भागेदारी से स्वर्णिम युग का सूत्रपात

हिमालय से जुड़े मुद्दों पर परामर्श करने हेतु हिमालय से जुड़े जनप्रतिनिधियों से नियमित रूप से विचार विमर्श हुआ I हिमालय की संवेदनशीलता की बातें सबसे साझा कर जन जागरूकता फैलाने में सफलता पाई हमें इस बात पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है कि सामुदायिक भागेदारी बढ़ाते हुए, सभी  हितधारकों में आपसी समन्वय स्थापित करते 

सतत विकास लक्ष्यों के प्रति पूर्ण समर्पण से सुनियोजित विकास के नए स्वर्णिम युग का सूत्रपात कर सकते हैं| हिमालय के समग्र विकास की चिंता को लेकर हुई स्पर्श हिमालय की स्थापना वर्ष 2019 में एक विचार मन में आया और हमने महसूस किया  कि हिमालय  में आर्थिक सामाजिक विकास की अवधारणा को क्रियान्वित करने हेतु एक समर्पित तंत्र की और स्तरीय ढांचे की आवश्यकता हैI  जिससे हिमालय से जुड़े सभी किया हितधारकों के मध्य हिमालय पर चिंतन हो| इस तंत्र को विकसित करने से पूर्व हिमालय की पारिस्थितिकी से जुड़े सभी हितधारकों की आशाओं अपेक्षाओं को साथ हमने हिमालय के लिए स्पर्श हिमालय एवं स्पर्श गंगा जैसे अभियानों को  शुरु किया | हिमालय के समग्र विकास की चिंता को लेकर हुई स्पर्श हिमालय को शुरु किया विकास की चिंता को लेकर हुई स्पर्श हिमालय को शुरु किया गया है। 

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