लेखक गांव (Lekhak Gaon)
हिमालय ऊर्जा का श्रोत
हिमालय युगों – युगों से मानव जाति की ऊर्जा और प्रेरणा का श्रोत रहा है। यही मानव संस्कृति और सभ्यता का पावन उद्गम भी बताया जाता है। पौराणिक काल से ही हमारे ऋशि मुनियों से लेकर देवी-देवताओं की यह हृदय स्थली रही है। हिमालय इस धरा धाम का सर्वोच्च और सर्वोतम पर्वत शिखर ही नहीं अपितु गरिमा और महिमा का शीर्षस्थ धरती का स्वर्ग भी है। हमारे वेद-पुराणों मे हिमालय को ‘‘देवात्मा’’ कहा गया है। अर्थात हिमालय देवताओं की आत्मा है। हिमालय भौतिक ही नहीं अपितु आध्यात्मिक शक्ति का भी आलौकिक पुंज है। यह मानव जाति की सृजनशीलता के साथ ही रोमांचित कर देती प्रकृति के रहस्यमयी सृजन का बीज है। एक ओर हिमालय हमारी जलवायु का मूलाधार है तो वहीं दूसरी ओर हमारे तन और मन की ऊर्जा का अद्वितीय और अद्भुत केंद्र होने के साथ-साथ मानव जाति के लिए सदियों से निरंतर चेतना, ऊर्जा और चमत्कारिक सिद्धियों का मंगल श्रोत रहा है।
इसी हिमालय की उपत्यकाओं में वेद-पुराण, उपनिशद्, योग और आयुर्वेद से लेकर हमारे प्राचीन ग्रंथों में समाहित ज्ञान-विज्ञान, धर्म और आध्यात्म की उत्पति भी हुई है। यह भारत की संस्कृति का प्राण है, जहाँ से भारत के विश्व गुरू बनने का मार्ग प्रषस्त हुआ। सृजन में परम साधना के लिये हिमालय से अच्छा मानसिक उर्वरता का क्षेत्र अन्यत्र कहीं हो ही नहीं सकता। स्वस्थ, सुन्दर और शांत वातावरण में प्रकृति का आत्मसात करके परम ज्ञान, अनंत आनंद और अदभुत विराटता की अनुभूति कराने वाला हिमालय वेदों, उपनिशदों, पौराणिक ग्रंथों और महाकाव्यों से लेेकर नाथ सिद्ध साहित्य एवं तमाम धार्मिक-साहित्यिक, सांस्कृतिक-आध्यात्मिक सृजन की उर्वरा भूमि रहा है। हिमालय ज्ञान-विज्ञान एवं आध्यात्म की अद्भुत शक्ति का पुंज व मानवता और जीवनदर्षन का अद्भुत केंद्र है। ‘‘वसुधैव कुटुम्बकम्’’ अर्थात ‘पूरी धरती, पूरा विश्व मेरा परिवार’ का भाव पैदा करने वाले ग्रंथों का इसी धरती पर सृजन हुआ। इसलिए पूरी दुनिया में सुख शान्ति और समृद्धि तथा प्रकृति का रास्ता हिमालय से होकर ही गुजरता है। इन्हीं स्वभाव और भावनाओं को संजोने और विश्व मानव तक पहुँचाने का प्रयास है ‘विश्व प्रेरणा’ स्पर्ष हिमालय अभियान’।
हिमालय का लेखक गांव
धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले हिमालय ने विश्व कल्याण के पथ पर सुख,समृद्धि, अन्न, धन, आरोग्यता और विश्व शांति के द्वार प्राणी जगत के लिए खोले हैं। दिव्य हिमालय के कण-कण की अलौकिकता को महसूस करने, उसे आत्मसात करने,संस्कृति, सभ्यता और परम्पराओं को जानने, हिमालय के विविध रूपों को देखने-समझने, ज्ञान-विज्ञान, शोध एवं अनुसन्धान की दिशा में नवाचारी पहल करने और हिमालय का महत्व पूरे विश्व में प्रसारित करने का संकल्प लिया है ‘स्पर्श हिमालय’ अभियान ने। ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के भाव को संस्कृति, आध्यात्म, ज्ञान, विज्ञान के माध्यम से सम्पूर्ण विश्व को बन्धुत्व का पाठ पढ़ाने वाले हिमालय और हिमालयीय सरोकारों को संजोता ‘स्पर्श हिमालय अभियान’ पूरे विश्व में हिमालय के उच्च मौलिक चिन्तन,जीवनदर्शन और अमूल्य विपुल सम्पदाओं के संरक्षण संवर्द्धन के लिए संकल्पबद्ध है।
इसी संकल्पना की श्रृंखला में ‘स्पर्श हिमालय’ के तत्वावधान में निकट भविष्यमें एक अनोखा और अपने विशिष्ट ढंग के ‘लेखक गाँव’ की स्थापना प्रस्तावित है। हिमालयीय वैषिश्ट्यता लिए ‘लेखक गाँव’ का उद्देश्य देश-दुनियाँ के उन विलक्षण,विद्वान साहित्यकारों, गीतकारों, कलाकारों को ठौेर प्रदान करना है, जिनकी लेखनी नेअपने समय की कालजयी रचनाओं का सृजन कर आमजन के बीच लोकप्रियता हासिल की। जीवन के सफर में कई बार ऐसा भी समय आता है जब आर्थिक विपन्नता के कारण रचनाधर्मिता के उपासक और उनकी लेखनी समाज के हाशिये में कष्टप्रद जीवन जीते हैं। ‘लेखक गाँव’ की परिकल्पना ऐसे ही विद्वान, चिंतकों, दार्शनिकों, मनीषियों के निहितार्थ की गई है, जिनके भटकाव भरे जीवन को यहाँ असीम शांति और गतिशीलता प्रदान हो सके और एक स्वस्थ, शांत और प्राकृतिक रमणीयता से आपूरित परिवेश में निराश मन पुनः स्फूर्त होकर सृजनशीलता के पथ पर अग्रसर हो सके। स्पर्श हिमालय अभियान की इस अभिनव पहल से जहाँ एक ओर समाज कल्याण की दिशा में मानवता की सेवा और संवेदना का भाव प्रबल होगा वहीं, दूसरी ओर विद्वान लेखकों की सृजन यात्रा की अमूल्य धरोहरें देश और समाज के हितार्थ लेखक गाँव में संरक्षित होती रहेंगी। लेखक गाँव का स्वरुप यहीं सीमित नहीं होता है। इसका उद्देश्य हिमालय की श्रृंखलाओं की भांति विशाल है। यह हिमालयीय अध्ययन केन्द्र का एक ऐसा अद्भुत केंद्र होगा जहाँ एक ही परिसर में ध्यान एवं योग केन्द्र, हिमालयीय संग्रहालय, गंगा संग्रहालय, पाण्डुलिपियों एवं विविध ग्रंथों को संग्रहित करता एक पुस्तकालय,सभागार,ज्योतिष विज्ञान केन्द्र एवं शोध केन्द्र के साथ ही आवासीय सुविधा भी उपलब्ध होगी। एक ऐसा सुन्दर स्थान जहाँ साहित्य,संस्कृति, प्रकृति, चिंतन-मंथन और सृजन एक साथ आत्मसात हो सकेंगे। प्रकृति की मनोहारी छटाओं के मध्य स्थित यह स्थान हिमालय दर्शन के साथ सुन्दर और सुव्यवस्थित जीवन दर्षन का आधार भी बनेगा इसी उद्देश्य से ”लेखक गाँव“ की परिकल्पना की गई है।

लेखक कुटीर
लेखक गाँव की मूल परिकल्पना को यथार्थ के धरातल पर उतारते ‘लेखक कुटीर’ इस परिसर का सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनाओं को सहेजते आवासीय भवन होंगे। जीवन के तमाम कड़वे-मीठे अनुभवों और झंझावतों को स्वयं में समेटे ऐसे वयोवृद्ध लेखकों के लिए यह परिसर स्वयं में स्नेह और आशीष की छाँव में स्थापित एक ऐसा स्थान होगा जहाँ प्रतिक्षण मानवता की सेवा चरितार्थ होगी। विश्व के हिमालयीय सरोकारों से जुड़े प्रसिद्ध लेखकों, साहित्य साधकों एवं कालाकारो के नाम से ‘लेखक कुटीर’ नाम की तख्ती सजी होगी। प्रकृति के आँचल में नाना प्रकार के फूलों की सुगन्धित खुशबू पूरे परिसर को सकारात्मक ऊर्जायुक्त तरंगों से महका देगी। अध्ययन, लेखन और जीवन को जीवंत बनाने के लिए ‘लेखक कुटीर’ में निवास कर रहे लेखकों को यथासम्भव सुविधाएँ उपलब्ध कराने का प्रयास किया जायेगा।

हिमालयी रसोई
माँ अन्नपूर्णा की असीम कृपा बरसाती ‘हिमालयी रसोई’ में हिमालय अंचल में उत्पादित पूर्णरूपेण शुद्ध जैविक उत्पादों से निर्मित आहार की व्यवस्था रहेगी। उत्तराखण्ड हिमालय के स्वादिष्ट एवं पौष्टिक पकवानों जैसे मण्डवे की रोटी, मक्के की रोटी, पल्लर, झंगरियाल से बने पकवान, तोर की दाल, कुलथ की दाल, कण्डाली का साग, पंचमढ़ी दाल, हींग-जख्या के तड़के की सब्जियाँ, लाल चावल,कुमाउँनी चटनी इत्यादि के रसास्वाद का आनन्द प्राप्त होगा। गुड़ की चाय और शिलाजीत की चाय की खुषबू हिमालयी रसोई की ओर सभी को खींच लायेगी, जो तन के साथ मन को भी स्फूर्ति प्रदान करेगी। हिमालयी पुष्पों के अर्क से बना शीतल पेय शीतलता के साथ तमाम व्याधियों से लड़ने की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ायेगा।
गंगा एवं हिमालय संग्रहालय
हिमालय से उद्गमित माँ गंगा भारत की संस्कृति का प्राण है। हिमालय गंगा का मायका है। मायके में एक बेटी की भाँति गंगा की स्वच्छ, निर्मल और शीतल सहायक जलधारायें, फेनिल झरनों, ऊची-नीची पहाड़ियों और सर्पीली घाटियों में अठखेलियाँ करते, नाचते-कदूते, गुनगुनाते मानव कल्याण के लिए बढ़ती जाती है। ‘लेखक गाँव परिसर में स्थापित गंगा संग्रहालय में माँ गंगा और उसकी सहायक नदियों के बारे में विस्तृत जानकारी चित्रों, पोस्टर,मूर्तियों, मॉडल इत्यादि के माध्यम से संग्रहित की जायेगी। पावन नदियों के तटों पर लगने वाले मेले उत्सवों की सुन्दर डिजिटल झाकियाँ ऑडियो विजुअल के माध्यम से प्रस्तुत की जाएँगी। ‘गंगा संग्रहालय’ का उद्देश्य गंगा एवं अन्य सहायक नदियों पर लिखे ग्रन्थ, आलेख, शोध पत्र, साहित्य, चित्रकारी आदि को संरक्षित करने के साथ-साथ नदियों के संरक्षण एवं संवर्द्धन का संदेश देना है। ‘हिमालय संग्रहालय’ हिमालय के उन सभी वस्तुओं,यंत्रों, पुस्तकों, कलाकृतियों को संग्रहित कर सुन्दर स्वरूप में सुसज्जित एक ऐसा अद्भुत संग्रहालय होगा, जो हिमालयीय लोगों की जीवन शैली, आध्यात्मिक चिंतन, हस्त कौशल और हिमालयी कला को प्रदर्शित करता हो। यहाँ के जनजीवन से जुड़ी वस्तुएँ जो अब विलुप्ति की कगार पर हैं, पोशाक, आभूषण, बर्तन, कृशियंत्र एवं बाद्य यंत्र इत्यादि को संरक्षित करना हिमालय संग्रहालय का उद्देश्य है।
हिमालय सभागार
आधुनिक सुविधाओं से युक्त हिमालय सभागार का स्वरूप बहुत भव्य होगा। लगभग एक हजार व्यक्तियों के बैठने की क्षमतायुक्त इस सभागार में सांस्कृतिक, साहित्यिक, आध्यात्मिक एवं धार्मिक गोष्ठियाँ तथा ज्ञान-विज्ञान समारोह इत्यादि का आयोजन होगा। सभागार के बाहर हराभरा मखमली घास का मैदान और पुष्प वाटिका आगन्तुकों को सुखद अनुभूति प्रदान करायेगा। आगन्तुकों के वाहनों की व्यवस्था हेतु निकट ही पार्किंग उपलब्ध रहेगा ताकि आवाजाही में किसी प्रकार का गतिरोध उत्पन्न न हो। ‘स्पर्श हिमालय’ के ‘लेखक गाँव’ में आगन्तुकों की सुविधा एवं सहजता पर विशेष ध्यान देने का प्रयास किया जायेगा ताकि हम ‘अतिथि देवो भवः’ की भावना को आत्मसात कर सके।

हिमालय ग्रंथालय
ग्रंथालय में समस्त हिमालय राज्यों के साहित्य, संस्कृति, इतिहास, सामाजिक, राजनितिक, भूगोल, दर्शन, धर्म, ज्ञान-विज्ञान आदि विशयों से सम्बंधित ग्रंथो कोे स्थान दिया जाएगा। प्राचीन ऐतिहासिक मूर्तियों, चित्रों, सिक्को, पाण्डुलिपियों एवं अन्य दुर्लभ वस्तुओं का संग्रह किया जाएगा। पहाड़ी चित्र कला, विश्व स्तरीय फोटोग्राफरों के चित्र ग्रंथालय की शोभा बढ़एंगे। ग्रंथालय का अतिरिक्त परिवेश निर्मित करते हुए इस बात का विशेष ध्यान रखा जाएगा कि पवित्रता और शांति का वातावरण बना रहे। ग्रंथालय का निर्माण हिमालयी लोक संस्कृति, वास्तु शिल्प के उद्धरण रूप में निर्मित होगा। पहाड़ी गाँव के भवन निर्माण शिल्प के आधार पर हिमालय ग्रंथालय का निर्माण किया जाएगा जिसमे खोली, छज्जा एवं तिवारी बनाई जाएगीे। ग्रंथालय पहाड़ी पत्थर एवं स्थानीय ककाश्ठ से निर्मित किया जाएगा। ग्रंथालय का निर्माण हिमालयी लोक संस्कृति, वास्तु शिल्प के उद्धरण रूप में निर्मित होगा।

हिमालय ज्योतिष विज्ञान केन्द्र
ज्योतिष शास्त्र एक पूर्ण वैज्ञानिक अध्ययन है। ज्योतिष वेदों का छठा अंग कहा जाता है। ज्योति पिण्डो एवं नक्षत्रों के माध्यम से जड़ चेतन के प्रभावों के अध्ययन को ज्योतिष विज्ञान कहा जाता है। समस्त ब्रह्माण्ड को संचालित करने वाली सौर मण्डलीयद्ध शक्तियों, नक्षत्रों, राशियों का गणितीय संयोजन एवं अध्ययन ज्योतिष विज्ञान के अन्तर्गत किया जाता है। वर्तमान समय के खगोल विज्ञान का आधार है ज्योतिष विज्ञान। पृथ्वी पर होने वाली ऋतु परिवर्तन, समुद्र में उठते ज्वार-भाटे की स्थिति, सूर्य-चन्द्र समेत सभी ग्रह उपग्रहों की गति एवं उसका मानव जीवन पर होने वाले प्रभाव का विश्लेषण ज्योतिष विज्ञान के आधार पर ही किया जाता है। इसी प्राचीन वैज्ञानिक पद्धति को प्रमाणिक तरीके से शोध और अनुसंधान के दृष्टिगत एक अद्भुत ज्योतिष विज्ञान केन्द्र की स्थापना लेखक गाँव के परिसर में होगी, जिसका उद्देश्य भारतवर्ष की प्राचीन ज्ञान परम्परा को विश्व में प्रचारित-प्रसारित करना होगा।

हिमालय योग एवं ध्यान केंद्र
आज के भागमभाग एवं व्यस्त जीवन में मनुष्य तेजी से तमाम मानसिक विकारों के घेरे में आकर अवसादग्रस्त और असंतुष्ट नजर आ रहा है। ऐसे में स्वस्थ तन-मन और शांत की प्राप्ति हेतु मानव के लिऐ ध्यान एवं योग की अत्यंत महत्वपूर्ण आवष्यकता है, ताकि मानव को आत्मिक संतुष्टि एवं शांति मिल सके। आज सम्पूर्ण विश्व में ‘योग’ के प्रति लोगों का झुकाव इस बात को प्रमाणित करता हैै कि मनुष्य भी ‘स्वस्थस्य स्वास्थ्य रक्षणम’ अर्थात ‘‘स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा करना’’ की सूक्ति को अपनाना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से लेखक गाँव के प्राकृतिक सौन्दर्य से परिपूर्ण प्रांगण में ध्यान एवं योग केन्द्र की स्थापना की जाएगी। यहाँ आगन्तुक तथा लेखक कुटीर में निवासरत लोगों के लिए मेडिटेशन एवं यौगिक क्रियाओं के लाभ लेने के अवसर प्राप्त होंगे।

हिमालय पंचकर्म एवं प्राकृतिक चिकित्सा केन्द्र
आयुर्वेद के अन्तर्गत पंचकर्म से दुःसाध्य रोगों के इलाज की पौराणिक पद्धति है, प्राकृतिक चिकित्सा प्रणाली चिकित्सा की ही एक रचनात्मक पद्धति है जिसका उद्देश्य प्रकृति प्रदत्त तत्वों का उपयोग करते हुए रोग का मूल कारण हमेशा के लिए समाप्त करना है। वर्तमान परिस्थितियों में रोगों के इलाज के लिए ये सफल एवं सुरक्षित पद्धतियाँँ हैं। ‘लेखक गाँव’ के परिसर में पंचकर्म एवं प्राकृतिक चिकित्सा केन्द्र की स्थापना की जाएगी जिसमें देश-विदेश के विशेषज्ञों के द्वारा आगन्तुकों को चिकित्सकीय सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएंगी।
हिमालय अतिथि लेखक विश्राम गृह
लेखक गांव में आने वाले छात्रों, शोधार्थियों, लेखकों एवं विभूतियों सहित सभी आगंतुकों की आवासीय व्यवस्था, भवन का परिवेश केवल छात्रावास या विश्रामगृह तक सिमित न हो कर सुख, परम शांति और अद्भुत आनन्द से परिपूर्ण घर का पूर्ण आभास प्रदान करेगा। आवासीय परिसर प्रकृति के मध्य आगंतुकों के चित और चिंतन को नव ऊर्जा प्रदान करके आवासीय समय को सकारात्मक ,रचनात्मक तथा अविस्मरणीय बना सके, ऐसा हमारा प्रयास रहेगा।
हिमालय का लेखक गाँवः साकार होती एक अद्भुत परिकल्पना विनम्र आग्रह
स्पर्ष हिमालय ‘लेखक गाँव की संरचना का प्रारूप आपके सामने प्रस्तुत है’ इस बृहद योजना पर प्रथम चरण का कार्य प्रगति पर है। इस योजना हेतु बृहद संसाधनों की आवष्यकता भी अपेक्षित है। लेखक गाँव अपने विविध उद्येष्यों की पूर्ति के लिए अपनी भव्यता, कलात्मकता और नैसर्गिक छटा के साथ देष तथा दुनिया के समक्ष प्रस्तुत होने के लिए उत्सुक है। इस अभिनव पहल को उसके पावन उद्येष्य तक पहुचाने हेतु हमे आपके महत्वपूर्ण सुझाव, मार्गदर्षन और अपरिमित सहयोग की आवश्यकता है।


























